ईरान-इज़राइल संघर्ष का शेयर बाज़ार पर असर. अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला कर दिया. ईरान की ओर से इजराइल पर मिसाइलें भी दागी गईं. इससे दुनिया भर के बाजारों में हलचल देखने को मिल सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटनाक्रम से भारतीय शेयर बाजार पर भी दबाव पड़ सकता है.
निवेशकों की बिक्री बढ़ने की संभावना है. फिलहाल बाजार की नजर ईरान की संभावित प्रतिक्रिया पर है, क्योंकि भविष्य की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि यह तनाव कब तक जारी रहेगा।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं
ईरान में बने इस हालात का असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है. क्योंकि ईरान दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में से एक है। युद्ध जैसी स्थिति में सप्लाई चेन बाधित हो सकती है. जिससे भारत समेत बड़े तेल आयातक देशों में दिक्कतें पैदा हो सकती हैं. आपूर्ति बाधित होने से तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. चीजों की कीमत में बढ़ोतरी भी संभव है।
कच्चे तेल की ताजा कीमत करीब 67 डॉलर प्रति बैरल है. तेल की बढ़ती कीमतों के कारण शेयर बाजार की धारणा भी खराब होने की संभावना है। निवेशक सतर्क रहें और निवेश रणनीतियां विकसित करें, जिससे बाजार में दबाव बढ़ने की संभावना है।
किन क्षेत्रों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ सकता है?
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर कुछ सेक्टर पर पड़ सकता है. सबसे ज्यादा नुकसान ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को होगा. जिसके चलते हमें पेट्रोल और डीजल ईंधन की कीमत में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका रहेगी.
इसके अलावा पेंट निर्माता कंपनियों, विमानन कंपनियों और पेट्रोकेमिकल कंपनियों के शेयरों में भी तेज हलचल देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अनिश्चित माहौल में अगले कुछ हफ्तों में शेयर बाजार में जोरदार उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
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