- मध्य पूर्व में तनाव के कारण भारतीय बाज़ार और आईपीओ में गिरावट आई।
- कंपनियां उचित मूल्यांकन न मिलने के डर से आईपीओ लाने से कतराती हैं।
- 144 कंपनियां 1.75 लाख करोड़ जुटाने की तैयारी में हैं।
- फ्लिपकार्ट, फोनपे, जियो जैसे बड़े नाम बेहतर सिग्नल का इंतजार कर रहे हैं।
आईपीओ बाजार में मंदी. मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण भारतीय बाजार दबाव में है। वहीं, विदेशी निवेशक भी घरेलू बाजार से लगातार निकासी करते नजर आ रहे हैं। तनाव का असर आईपीओ बाजार पर भी पहुंच रहा है.
कई कंपनियाँ अपनी समस्याओं को जनता के सामने लाने से बचती हैं। कंपनियों को डर है कि पैदा हुए हालात और कमजोर मांग की स्थिति में उन्हें उचित मूल्यांकन नहीं मिल पाएगा. आंकड़ों पर गौर करें तो करीब 3 लाख करोड़ रुपये के आईपीओ कतार में हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव का असर
शेयर बाजार में लगातार कमजोरी और ईरान-अमेरिका तनाव ने मिलकर निवेशकों पर दबाव डाला है। विदेशी निवेशक भी लगातार बिकवाली कर रहे हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी चिंता का विषय है। ऐसे में कंपनियां अभी भी आईपीओ लॉन्च करने से बचती हैं। कंपनियों का मानना है कि इस समय बेहतर समय का इंतजार करना एक समझदारी भरा कदम है।
बड़ी संख्या में कंपनियां तैयार हैं
आईपीओ बाजार धीमा पड़ने से कंपनियां अपनी तैयारियों में जुट गई हैं। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा अनुमोदित 144 कंपनियों ने लगभग 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई है। जबकि 63 अन्य कंपनियां करीब 1.37 लाख करोड़ रुपये जारी करने की मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। सामान्य तौर पर, इस सूची में 200 से अधिक कंपनियां शामिल हैं।
बड़े नाम भी सही वक्त का इंतजार कर रहे हैं
IPO की तैयारी कर रही कंपनियों में कई बड़े नाम भी शामिल हैं. फिलहाल, वे जल्दी में नहीं हैं और बाजार से सकारात्मक संकेत मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कतार में फ्लिपकार्ट, एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट, फोनपे और ज़ेप्टो जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
निवेशक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और जियो जैसे बड़े नामों का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है कि जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ करीब 40,000 करोड़ रुपये का हो सकता है. इस लिहाज से यह भारत का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है.
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