सब्जियों के दाम. अगर आप अभी सोच रहे हैं कि महंगाई कितनी बढ़ गई है तो दिल थाम लीजिए. निकट भविष्य में तस्वीर और भी बदलेगी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कमजोर मॉनसून और बारिश की कमी के कारण निकट भविष्य में खाद्य उत्पादों की कीमतों पर असर पड़ सकता है। सबसे बड़ी चिंता टमाटर और सभी जल्दी खराब होने वाली सब्जियों को लेकर है. इसके अलावा दाल-चावल की कीमतें भी बढ़ सकती हैं, जिससे आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ने का खतरा है.
दरअसल, जुलाई में बारिश कम हो जाती है, जिससे बुआई क्षेत्र और फसल उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। फिर इसका सीधा असर बाजार की कीमतों पर आने वाले महीनों में दिखेगा.
टमाटर होंगे महंगे.
चलिए मान लेते हैं कि मौसम परिवर्तन का असर सबसे पहले टमाटर, प्याज, हरी सब्जियों और अन्य खराब होने वाली फसलों की कीमतों पर पड़ता है। जब वर्षा कम होती है तो इनकी आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे ये बाजार में ऊंचे दामों पर उपलब्ध होते हैं। इसलिए इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि अगले कुछ हफ्तों में सब्जियों की कीमत में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
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दाल-चावल भी महंगे हो जायेंगे.
दिक्कत ये है कि सिर्फ सब्जियां ही नहीं, बल्कि चावल और दाल की रफ्तार भी दबाव में आ सकती है. यदि खरीफ सीजन की बुआई कमजोर हुई और फसल को अच्छी बारिश नहीं मिली तो फसल निश्चित तौर पर प्रभावित होगी. ऐसे में निकट भविष्य में इनकी कीमतें बढ़ जाएं तो कोई आश्चर्य नहीं होगा.
क्यों बढ़ी चिंता?
इस साल मॉनसून की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही. कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश हुई. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर बारिश में सुधार नहीं हुआ तो इसका असर खेती पर पड़ सकता है। कृषि पर प्रभाव का मतलब है कि बाजार में आपूर्ति कम होगी और मांग के सापेक्ष उत्पादों की कम उपलब्धता के कारण कीमतें बढ़ सकती हैं।
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महंगाई पर असर पड़ेगा
खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों का असर न सिर्फ आपकी जेब पर पड़ेगा, बल्कि देश की खुदरा महंगाई दर पर भी इसका असर दिख सकता है। सब्जियों, दालों और अनाज के दाम बढ़ने पर खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ सकती है.
क्या घबराने की कोई जरूरत है?
फिलहाल घबराने और जरूरत से ज्यादा खरीदारी करने की जरूरत नहीं है. हालांकि, अगर आने वाले दिनों में ठीक से बारिश नहीं हुई तो सब्जियों और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसलिए बाज़ार और मौसम का ध्यान रखना ज़रूरी है।
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